Rahul Sankrityayan : An introduction of the vagabond literary genius

पहले जन्मदिन पर चलना-चलने लगना मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। उसने भूमि का अपना अधिस्पर्श छोड़ दिया : अब वह तलवों-भर से उसे छूता हुआ पूरा जीवन गुज़ारा करेगा। मगर चलना या चलने लगना भर मानव-उत्थान के लिए पर्याप्त नहीं है। चलते तो जानवर भी हैं : वे भी जो तैरते मत्स्य हैं